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सुकरात: अपने विचारों से समझौते की बजाय ज़हर क्यों चुना?

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Photo: A Statue of Socrates क्या आप एक ऐसे व्यक्ति के बारे में जानते हैं जिसने अपनी सोच, अपने विचारों से समझौता करने की बजाय ज़हर पीकर खुशी-खुशी मौत को स्वीकार करना सही समझा? हम बात कर रहे हैं पश्चिम के एक महान दार्शनिक सुकरात (Socrates) की, जिसे पश्चिमी दर्शन का पिता कहा जाता है। कौन थे सुकरात? सुकरात का जन्म 469 ईसा पूर्व में प्राचीन ग्रीस की राजधानी एथेंस में हुआ था। प्राचीन एथेंस एक बहुत ही सुंदर शहर था, परंतु वहां जन्मे सुकरात को सुंदरता नसीब न थीं। सर पर लंबे बाल, ऊबड़-खाबड़ दाढ़ी, चपटी नाक और गोल-मटोल पेट वाले सुकरात छोटे कद के और मजबूत शरीर के थे। वे हमेशा नंगे पांव रहते थे और पूरे शरीर पर केवल एक लबादा ओढ़े रहते थे। सुकरात दिखने में भले ही कुरूप थे, लेकिन उनके जीवन और विचारों में सुंदरता की कोई सीमा नहीं थी। वे बुद्धिमान और चिंतनशील स्वभाव के एक सीधे-सादे व्यक्ति थे। एथेंस में सुकरात के खिलाफ कई तरह के आरोप लगे और इनके चलते अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई। फोटो: सुकरात की एक मूर्ति  सुकरात के विचार क्या थे? सुकरात एक जिज्ञासु स्वभाव के व्यक्ति थे और किसी भी बात को गहराई स...

आदि शंकराचार्य: हिन्दू धर्म के मसीहा | Adi Shankaracharya: The Great Philosopher of Hinduism

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Photo: A Statue of Adi Shankaracharya  भारत में आज सनातन धर्म का विस्तार जिस मुकाम पर दिखाई देता है, उसका श्रेय काफी हद तक आदि शंकर को दिया जाता है। शंकर को दुनिया जगद्गुरु आदि शंकराचार्य के नाम से जानती है। आदि शंकराचार्य का जन्म ( Birth of Adi Shankaracharya ) शंकर का जन्म 788 ईस्वी में केरल के कालड़ी नामक गाँव में हुआ माना जाता है। हालांकि शंकराचार्य परंपरा से जुड़े कुछ विद्वानों का मत है कि उनका जन्म 507 ईसा पूर्व में हुआ था। उस समय की सामाजिक स्थिति ( Social Conditions of That Time ) शंकराचार्य के जन्म के समय भारत में बौद्ध धर्म का व्यापक प्रभाव था। बौद्ध भिक्षु गाँव-गाँव घूमकर गौतम बुद्ध की शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार करते थे और सामान्य जन उनसे अत्यधिक प्रभावित होते थे। बौद्ध धर्म के इतने प्रभाव का एक प्रमुख कारण यह था कि उस समय हिंदू धर्म में कर्मकांड को अत्यधिक महत्व दिया जाने लगा था। सामान्य जन कर्मकांड से विशेष जुड़ाव महसूस नहीं करते थे, जबकि बुद्ध का नीतिपरक धर्म उन्हें सरल और पालन करने योग्य प्रतीत होता था। बौद्धों के प्रभाव का एक कारण यह भी था कि हिंदू धर्म की आड़ में पा...