सुकरात: अपने विचारों से समझौते की बजाय ज़हर क्यों चुना?

A Statue of Socrates
Photo: A Statue of Socrates


क्या आप एक ऐसे व्यक्ति के बारे में जानते हैं जिसने अपनी सोच, अपने विचारों से समझौता करने की बजाय ज़हर पीकर खुशी-खुशी मौत को स्वीकार करना सही समझा?
हम बात कर रहे हैं पश्चिम के एक महान दार्शनिक सुकरात (Socrates) की, जिसे पश्चिमी दर्शन का पिता कहा जाता है।

कौन थे सुकरात?

सुकरात का जन्म 469 ईसा पूर्व में प्राचीन ग्रीस की राजधानी एथेंस में हुआ था।
प्राचीन एथेंस एक बहुत ही सुंदर शहर था, परंतु वहां जन्मे सुकरात को सुंदरता नसीब न थीं।
सर पर लंबे बाल, ऊबड़-खाबड़ दाढ़ी, चपटी नाक और गोल-मटोल पेट वाले सुकरात छोटे कद के और मजबूत शरीर के थे। वे हमेशा नंगे पांव रहते थे और पूरे शरीर पर केवल एक लबादा ओढ़े रहते थे।
सुकरात दिखने में भले ही कुरूप थे, लेकिन उनके जीवन और विचारों में सुंदरता की कोई सीमा नहीं थी।
वे बुद्धिमान और चिंतनशील स्वभाव के एक सीधे-सादे व्यक्ति थे।
एथेंस में सुकरात के खिलाफ कई तरह के आरोप लगे और इनके चलते अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई।

सुकरात की एक मूर्ति
फोटो: सुकरात की एक मूर्ति 

सुकरात के विचार क्या थे?

सुकरात एक जिज्ञासु स्वभाव के व्यक्ति थे और किसी भी बात को गहराई से जांचे-परखे बिना स्वीकार नहीं करते थे।
अगर कोई व्यक्ति अपने आप को मसीहा अथवा सर्वज्ञ होने का दावा करता, तो सुकरात उससे तब तक प्रश्न करते थे जब तक वह व्यक्ति निरुत्तर नहीं हो जाता था।
सुकरात जीवन के मूलभूत सवालों पर बात करते थे, जैसे — खुशी कैसे मिलती है? अच्छाई क्या है? नैतिकता क्या है? प्रेम क्या है? डर क्या है? कैसे बेहतर जीवन जिया जा सकता है?
सुकरात का मानना था कि —
“यदि कोई व्यक्ति बिना अपने अस्तित्व के बारे में सवाल किए जीता चला जा रहा है, तो वह मूर्ख है।”
वे कहते थे कि —
“बिना जांचा-परखा जीवन जीने के लायक नहीं है।”
सुकरात ने जीवन के हर गूढ़ विषय के बारे में प्रश्न किया और समझा।
उन्होंने कभी भी सब कुछ जानने अथवा सर्वज्ञ होने का दावा नहीं किया, बल्कि वे प्रश्नों के माध्यम से किसी बात की तह तक जाते थे।
सुकरात हमेशा एक बात कहा करते थे —
“मैं जानता हूं कि मैं कुछ नहीं जानता।”
सुकरात की बातें किताबी नहीं थीं और न ही वे किसी संस्था से जुड़े हुए थे। उनका पूरा जीवन तो सार्वजनिक था।
सुकरात तो एक ऐसा फकीर था जो एथेंस के सार्वजनिक स्थानों, जैसे बाजारों और सड़कों पर, जीवन के गंभीर मुद्दों पर चर्चा किया करता था।
सुकरात का सादा व्यक्तित्व और उनके विचारों से एथेंस के युवा काफी प्रभावित होते थे, और इसलिए जब भी सुकरात सार्वजनिक चर्चा करते थे तो उनके चारों तरफ युवाओं की भीड़ लग जाती थी।

Thinking Socrates
Photo: Statue of Socrates 


Socrates in a Debate
Photo: Socrates in a Debate

पारंपरिक पेशेवर सुकरात से नाखुश

सुकरात वाद-विवाद और भाषण कला के उन पारंपरिक शिक्षकों के विरोधी थे जो शिक्षा के लिए धन लेते थे और बदले में घिसी-पिटी शिक्षा देते थे।
सुकरात से नेताओं की भी तनातनी बनी रहती थी क्योंकि सुकरात उन्हें पाखंडी और ढोंगी कहते थे।
सुकरात का कहना था कि "जब ये नेता अपने खुद के जीवन की समस्याओं का हल नहीं निकाल सकते, तो जनता की समस्याओं का कैसे निकालेंगे।"
कवियों के बारे में सुकरात कहा करते थे कि "कवि काल्पनिक बातें करते हैं, जिनका यथार्थ जीवन से कोई लेना-देना नही होता। उनके के द्वारा लिखी कविताएं उन्हें खुद ही समझ नही आती।"
इस प्रकार सुकरात समाज पारंपरिक पेशेवर लोगों के विरोधी थे।
ऐसे शिक्षकों से सुकरात कुछ गहरे प्रश्न करके उनकी बखिया उधेड़ देते थे।

सुकरात का पारिवारिक जीवन 

सुकरात अपना अधिकतर समय वाद-विवाद और तर्क-वितर्क में खर्च करते थे, जिस वजह से उनका अपनी पत्नी के साथ झगड़ा होता रहता था।
सुकरात की पत्नी एक झगड़ालू महिला थी और सुकरात की जीवन शैली को नापसंद करती थी।
अक्सर सुकरात के अपनी पत्नी के साथ एक संवाद की चर्चा की जाती है।
जब सुकरात की पत्नी ने कहा —
“तुम कोई काम-धंधा क्यों नहीं करते? अपना सारा समय फालतू के वाद-विवाद में जाया कर देते हो। तुम्हारे इन नैतिकता, अच्छाई और न्याय के विचारों से घर नहीं चलता।”
तब सुकरात ने जवाब दिया —
“तुम्हें तो गर्व करना चाहिए कि तुम सुकरात की पत्नी हो, क्योंकि जब तुम्हारा पति सड़कों पर निकलता है तो लोग उसे सर झुकाकर अभिवादन करते हैं। लोग ऐसा अभिवादन किसी रईस आदमी का भी नहीं करते।”

सुकरात का कठिन जीवन

स्पार्टा से युद्ध में हार के बाद एथेंस की पुरानी लोकतांत्रिक सरकार बदल गई और एक नया राजनीतिक शासन उभरकर आया।
युद्ध के बाद एथेंस में गरीबी और भुखमरी से पीड़ित लोगों को सुकरात की अच्छाई और नैतिकता की बातें अव्यवहारिक लगने लगीं।
सुकरात की ख्याति से जलने वाले लोगों ने उस पर बहुत से गंभीर आरोप लगाए।
सुकरात पर कानून को न मानने, एथेंस के पारंपरिक देवी-देवताओं को न मानने और नास्तिक होने जैसे आरोप लगाए गए।
सुकरात पर एक बड़ा आरोप एथेंस के युवाओं को भड़काने का लगाया गया।
इन सब आरोपों के आधार पर एथेंस की नई सरकार के शासन में अदालत के द्वारा सुकरात को मौत की सजा सुनाई गई।

Socrates
फोटो: सुकरात का चित्र

सुकरात को मौत की सजा

एथेंस की नई सरकार में अदालत के द्वारा सुकरात पर लगे आरोपों के आधार पर एक ज्यूरी का गठन किया।
ज्यूरी ने सबसे पहले सुकरात पर लगे सभी आरोपों को पढ़ा। फिर सुकरात को अपने ऊपर लगे सभी आरोपों पर अपनी दलील देने के लिए कहा गया।
अपनी दलील में सुकरात ने ज्यूरी के सामने अपने विचार रखे।
ज्यूरी ने सुकरात पर लगे सभी आरोपों और उनके खिलाफ दी गई दलीलों के आधार पर हेमलॉक (
Hemlock) ज़हर पीने की सजा सुनाई।
ज्यूरी द्वारा मौत की सजा देने पर भी सुकरात थोड़े से भी विचलित नहीं हुए क्योंकि वे जानते थे कि वे सही थे।
ज्यूरी द्वारा सुकरात के सामने मौत की सजा के बदले हर्जाना देने की पेशकश की गई, पर सुकरात ने इसे नहीं माना और अपने विचारों पर अडिग रहकर मौत की सजा स्वीकार कर ली।
अगर सुकरात के पक्ष में तीन वोट और पड़ते, तो उसे मृत्यु दंड नहीं मिलता।

हेमलॉक ज़हर पीते हुए सुकरात
फोटो: हेमलॉक ज़हर पीते हुए सुकरात

मृत्यु दंड मिलने पर जब सुकरात कारावास में थे, तब उसके प्रिय शिष्यों प्लेटो और जैनोफन ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर अपने गुरु को कारावास से भागकर किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाने की योजना बनाई।
सुकरात ने अपने शिष्यों की इस योजना को नकार दिया और कहा —
“अगर मैं अपनी जान बचाने की कोशिश करूंगा, तो मैंने जीवन भर जो किया वह सब व्यर्थ हो जाएगा। जो मैं सोचता हूं, मैं उसके विपरीत नहीं जा सकता।”
इस तरह अपने विचारों के विरुद्ध जाकर न तो सुकरात ने अपनी सजा के खिलाफ कोई अपील की और न ही कारावास से भागने की योजना को स्वीकार किया।
399 ईसा पूर्व में 71 वर्ष की आयु में कारावास में हेमलॉक ज़हर पीने से सुकरात की मृत्यु हो गई।

सुकरात के शिष्य Plato और Xenophon

सुकरात अपने जीवन में केवल बोलते ही रहे, उन्होंने किसी भी प्रकार की कोई किताब नहीं लिखी।
सुकरात के विचारों के बारे में जितना भी दुनिया जानती है, उसकी वजह उसके दो शिष्यों प्लेटो और जैनोफन द्वारा लिखा गया साहित्य है।
सुकरात द्वारा अपने आरोपों के खिलाफ ज्यूरी के सामने जो दलील पेश की गई थी, उस संवाद को प्लेटो ने
Apology नाम से लिखा है।
अपोलॉजी के अलावा प्लेटो द्वारा लिखी गई
Crito, Phaedo और जैनोफन की Memorabilia नामक किताबों में सुकरात के विचार और दर्शन मिलते हैं।

सुकरात के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और सदा समकालीन हैं।





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