कभी दुनिया का अजूबा थी... आज बदहाली का शिकार है: फतेहपुर शेखावाटी की 'नवाब अलफ खां की बावड़ी'

फतेहपुर शेखावाटी बावड़ी
2026 में फतेहपुर शेखावाटी बावड़ी की एक फोटो 

फतेहपुर शेखावाटी कस्बा राजस्थान के हेरिटेज शहरों में शुमार है और यहां की विश्व प्रसिद्ध वास्तुकला की वजह से इसे 'Open Art Gallery' भी कहा जाता है।

पर क्या आप जानते हैं कि फतेहपुर शेखावाटी में मध्यकाल की वास्तु और स्थापत्य कला का एक ऐसा नमूना मौजूद है, जो किसी अजूबे से कम नहीं है।
जी हां! हम बात कर रहे हैं फतेहपुर शेखावाटी की 'नवाब अलफ खां की बावड़ी' (
Nawab Alaf Khan ki Bawri) की, जिसे सन् 1614 ईस्वी में नवाब अलफ खां के बेटे दौलत खां ने बनवाया था। यह बावड़ी शेखावाटी में 'नवाबी बावड़ी' के नाम से प्रसिद्ध है।

The Famous Fatehpur Shekhawati Stepwell

यह बावड़ी अपने आप में इतनी अनूठी थी कि इतिहासकारों ने इसे दुनिया के 17 अजूबों में शामिल किया था।

फतेहपुर के बावड़ी गेट क्षेत्र का नाम भी इसी बावड़ी के नाम पर पड़ा है।

फतेहपुर बावड़ी एक अजूबा कैसे थी?

बावड़ी का निर्माण नागौर के एक कारीगर शेख महमूद द्वारा किया गया था। अंदर से इसका पूरा ढांचा एक भूल-भुलैया जैसा बनाया गया था।
ऐसा कहा जाता है कि इसके अंदर से एक सुरंग का रास्ता फतेहपुर किले तक बनाया गया था, जिसके जरिए नवाब की बेगमें स्नान के लिए आती थीं।
इतिहासकार रामगोपाल वर्मा ने अपनी किताब में एक चोर का जिक्र किया है, जो 12 वर्ष तक इस बावड़ी में रहा था और भूल-भुलैया की वजह से किसी के भी पकड़ में नहीं आया था।

नवाबी बावड़ी की वर्तमान स्थिति

दोस्तों, आज नवाब अलफ खां बावड़ी की स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि शायद ही किसी को विश्वास होगा कि अतीत में यह वास्तुकला का उम्दा नमूना रही थी।
तीन तरफ से आधुनिक निर्माण से ढकी यह ऐतिहासिक धरोहर केवल कूड़ा डालने का स्थान बन चुकी है।
आज फतेहपुर बावड़ी में पानी की जगह कूड़ा भरा हुआ है और कूड़े का ढेर दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है।

कूड़े से भरी हुई नवाबी बावड़ी (2026)

An Old Photo of 'Nawabi Bawri' filled with Garbage 

नवाब अलफ खां बावड़ी के जीर्णोद्धार की मुहिम (श्रमदान)

आज से लगभग दस वर्ष पहले प्रशासन और स्थानीय लोगों (Volunteers) ने संकल्पबद्ध होकर सामूहिक सहयोग से नवाबी बावड़ी की सफाई का बीड़ा उठाया था।
सफाई के इस श्रमदान अभियान में स्थानीय लोगों, खासकर युवाओं ने बढ़-चढ़कर योगदान दिया था। क्षेत्र के स्कूल भी इस अभियान से जुड़े थे और रोज छात्र एवं स्थानीय लोग मिलकर सफाई कार्य करते थे।
बावड़ी की सफाई में प्रशासन और स्थानीय निवासियों के इस योगदान को Media Coverage भी मिला था और इसने उस वक्त कस्बे में काफी सुर्खियां बटोरी थीं।


दस वर्ष पहले की 'नवाबी बावड़ी' की सफाई अभियान की खबरें 

फतेहपुर बावड़ी की सफाई का कार्य बिना किसी जेसीबी और अन्य मशीनों के, केवल हाथों से ही किया जाता था, ताकि इस ऐतिहासिक धरोहर के मूल स्वरूप को कोई नुकसान न पहुंचे।


'नवाब अलफ खां बावड़ी' की सफाई की खबरें

स्थानीय लोगों और प्रशासन द्वारा फतेहपुर बावड़ी की सफाई का संकल्प लेने के बावजूद भी यह श्रमदान अभियान ज्यादा दिन तक नहीं चल पाया।
बावड़ी की सफाई का काम क्यों और कैसे बंद हुआ, यह कहना भी मुश्किल है। अगर सफाई अभियान जारी रहता, तो शायद आज नवाबी बावड़ी साफ हो चुकी होती।
बावड़ी आज फिर उसी दयनीय स्थिति में है और अपने जीर्णोद्धार को तरस रही है। स्थानीय निवासी और प्रशासन, दोनों ही इसकी सुध लेने को तैयार नहीं हैं।


नवाब अलफ खां बावड़ी: दस वर्ष पहले की और 2026 की होर्डिंग

क्या युवाओं को आगे आने की जरूरत है?

राजस्थान का Fatehpur Shekhawati शहर अपनी हवेलियों, भित्तिचित्रों और नवाब अलफ खां बावड़ी जैसी ऐतिहासिक धरोहरों के कारण विश्व प्रसिद्ध है।
हर साल देशी-विदेशी सैलानी इस ऐतिहासिक शहर की अतुलनीय विरासत को देखने आते हैं।
हवेलियों की जगह मॉल और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बन चुके हैं। जो हवेलियां बची हुई हैं, वे जर्जर अवस्था में हैं और अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
क्या शहर की विरासत को कोई क्षति पहुंचाए बिना आधुनिक विकास नहीं हो सकता?
युवाओं को फतेहपुर शेखावाटी की इस विरासत को संजोकर रखने के लिए प्रयास करने की जरूरत है, अन्यथा आधुनिकता की आड़ में यह ऐतिहासिक शहर भविष्य में अपनी पहचान खो सकता है।
राजस्थान की यह Heritage City पर्यटन के क्षेत्र में अर्थव्यवस्था में योगदान देने की क्षमता रखती है।
फतेहपुर की 'नवाबी बावड़ी' भी संपूर्ण शेखावाटी क्षेत्र में पर्यटन का प्रमुख स्थल बन सकती है।


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