गुजरात में सोहन चिड़िया का ‘VIP’ चूज़ा: सुरक्षा में 50 अधिकारी और कर्मचारी तैनात
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| सोहन चिड़िया का दुर्लभ फोटो |
राजस्थान की दुर्लभ सोहन चिड़िया (Great Indian Bustard)
दोस्तों, बचपन में सोहन चिड़िया की कहानी तो आप सभी ने सुनी होगी। पर क्या आपने सोहन चिड़िया का केवल नाम ही सुना है या इसे कभी देखा भी है?
इसे देखना थोड़ा मुश्किल है क्योंकि यह बहुत दुर्लभ है और पूरे भारत में लगभग 150 के आसपास ही बची है।
Gen-Z तो शायद सोहन चिड़िया से बिल्कुल भी परिचित नहीं होगा।
Great Indian Bustard को राजस्थान में सोहन चिड़िया और गोडावण दोनों नामों से जाना जाता है। गुजरात में इसे घोराड़ भी कहा जाता है। यह लगभग एक मीटर लंबाई का एक भारी पक्षी होता है, जो प्रमुख रूप से राजस्थान में मिलता है।
राजस्थान के अलावा यह गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में भी पाया जाता है।
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| The Great Indian Bustard |
गुजरात में लंबे समय बाद सोहन चिड़िया के चूज़े का जन्म
सोहन चिड़िया को लुप्त होने से बचाने के लिए भारत सरकार द्वारा काफी प्रयास किए जा रहे हैं, जिसका ताजा उदाहरण हाल ही में गुजरात में देखने को मिला है।
26 मार्च 2026 को गुजरात के कच्छ के घास के मैदानों में दुर्लभ पक्षी सोहन चिड़िया के एक चूज़े का जन्म हुआ है। विलुप्त हो रहे इस पक्षी के चूज़े का जन्म होना एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
सोहन चिड़िया के नन्हें चूज़े के लिए सुरक्षा व्यवस्था
रोचक बात यह है कि चूज़े की रक्षा के लिए उच्च स्तरीय सुरक्षा का इंतजाम किया गया है।सोहन चिड़िया के इस नन्हे चूज़े की रक्षा के लिए वन विभाग के 50 अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, जो 24 घंटे इस पर नजर बनाए हुए हैं।
गुजरात के वन विभाग ने Great Indian Bustard के चूज़े की सुरक्षा के लिए, जिस जगह चूज़े का जन्म हुआ है, वहां जाने वाले सभी रास्ते बंद कर दिए हैं और आसपास के ग्रामीणों को भी अपने मवेशियों को इस क्षेत्र से दूर रखने के लिए कहा गया है।
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| सोहन चिड़िया अथवा गोडावण |
10 वर्षों के लंबे समय के बाद गुजरात और राजस्थान के सहयोग से कच्छ के मैदानों में किसी सोहन चिड़िया का जन्म हुआ है।
इस पूरे प्रोजेक्ट के तहत जैसलमेर के 'सम' ब्रीडिंग सेंटर से सोहन चिड़िया का एक फर्टाइल अंडा सुरक्षित तरीके से गुजरात ले जाकर मादा गोडावण के प्राकृतिक घोंसले में रखा गया। मादा गोडावण ने इस अंडे को अपनाया और इससे एक चूज़े ने जन्म लिया।
राजस्थान के निवासी, खासकर जो गांवों या छोटे कस्बों से हैं, उन्होंने बचपन में निश्चित रूप से सोहन चिड़िया की कहानियां सुनी होंगी।
कहानियों में सोहन चिड़िया के जिक्र से यह अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है कि वास्तव में यह किसी न किसी रूप में जीवन का हिस्सा रही होगी।
आज सोहन चिड़िया इतनी गंभीर रूप से विलुप्त हो चुकी है कि भारत सरकार ने इसे वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत विलुप्त प्रजातियों की श्रेणी में शामिल कर रखा है।
उम्मीद है कि सरकार के वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रमों की वजह से अधिक सोहन चिड़िया पैदा होंगी और खेतों, खुले मैदानों में देखने को मिलेंगी।




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