राजस्थान में स्कूल फीस तय करने में अभिभावकों की भूमिका क्या है?
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| Photo: Dramatic photo of a Private School |
देश में पिछले दस-पंद्रह वर्षों में प्राइवेट स्कूल (Private Schools) की संख्या तेजी से बढ़ी है और यह लगातार बढ़ रही है।
हालांकि शिक्षण संस्थान खोलना एक सेवा कार्य है, परंतु आजकल यह किसी व्यापार से कम नहीं है।
राजस्थान की बात करें तो यहां बड़े नगरों से लेकर छोटे कस्बों के गली-मोहल्लों तक पिछले कुछ वर्षों में निजी स्कूल कुकुरमुत्तों की तरह उभरे हैं।
निजी स्कूलों की संख्या बढ़ी है तो फीस (School Fees) और अन्य खर्चों को लेकर इनकी मनमानी भी बढ़ी है। स्कूलों की इस मनमानी को लेकर समय-समय पर जागरूक अभिभावकों की शिकायत पर यह बात सरकार के कानों तक पहुंची है।
क्या आप जानते हैं कि राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) ने निजी स्कूलों की बढ़ती फीस पर लगाम लगाने के लिए क्या-क्या कानूनी प्रावधान कर रखे हैं?
फीस निर्धारण में अभिभावकों की भागीदारी
राजस्थान सरकार द्वारा सन् 2016 में ही राजस्थान विद्यालय (फीस का विनियमन) अधिनियम, 2016 (Rajasthan School Fees Act 2016) पारित किया जा चुका है, जिसके अनुसार बच्चों के अभिभावक उनकी स्कूलों की फीस निर्धारित करने में अपनी अहम भूमिका निभाएंगे।
निजी स्कूलों को अपनी फीस इस अधिनियम के अनुसार ही तय करनी है और किसी भी प्रकार से अतिरिक्त फीस नहीं ली जा सकती है।
अभिभावक फीस तय करने में किस तरह भागीदार होंगे, इसके लिए सन् 2017 में इस अधिनियम के तहत सरकार द्वारा नियम (Rules 2017) भी बनाए जा चुके हैं।
इस अधिनियम में विभिन्न प्रकार की समितियों के गठन की बात की गई है, और इसके अनुसार निर्धारित फीस तीन वर्ष के लिए वैध मानी जाएगी।
माता-पिता-अध्यापक एसोसिएशन (Parents Teacher Association)
राजस्थान (फीस का विनियमन) अधिनियम के तहत हर निजी स्कूल को एक माता-पिता-अध्यापक एसोसिएशन (PTA) का गठन करना जरूरी है।
किसी निजी स्कूल के सभी अध्यापक और उसमें पढ़ने वाले सभी छात्र-छात्राओं के अभिभावक इस एसोसिएशन के सदस्य होंगे।
हर साल 15 अगस्त से पहले इस एसोसिएशन की एक बैठक करने का प्रावधान है।
विद्यालय स्तरीय फीस समिति (School Level Fee Committee)
राजस्थान (फीस का विनियमन) अधिनियम, 2016 के अनुसार प्रत्येक निजी स्कूल एक 'विद्यालय स्तरीय फीस समिति' का गठन करेगी, जिसमें —
अध्यक्ष — स्कूल मैनेजमेंट का प्रतिनिधि
सचिव — स्कूल प्रिंसिपल
सदस्य — स्कूल मैनेजमेंट द्वारा नामित 3 अध्यापक
सदस्य — माता-पिता-अध्यापक एसोसिएशन से 5 अभिभावक
होंगे।
'विद्यालय स्तरीय फीस समिति' द्वारा ही विद्यालय की फीस निर्धारित की जाएगी।
विद्यालय स्तरीय समिति का गठन कैसे होगा और वह कैसे काम करेगी, इस बारे में राजस्थान विद्यालय (फीस का विनियमन) नियम, 2017 (Rajasthan School Fees Rules 2017) में बताया गया है।
फीस का निर्धारण कैसे होगा?
फीस तय करने के लिए अलग-अलग कारकों को शामिल किया जाएगा, जो इस प्रकार होंगे —
- स्कूल का स्थान (स्कूल कहां स्थित है?)
- स्कूल का भूमिगत ढांचा और छात्रों को दी जाने वाली सुविधाएं
- स्कूल के शिक्षकों की गुणवत्ता
- स्कूल संचालन और रखरखाव में होने वाला खर्च
- स्कूल को डोनेशन और अन्य सरकारी योजनाओं द्वारा दिया गया फंड
- स्कूल स्टाफ की योग्यताएं
- वार्षिक वेतन वृद्धि के लिए उचित रकम
- विद्यालय की कुल कमाई में से छात्रों पर किया गया खर्च
- विद्यालय के विस्तार और शिक्षा के विकास के लिए उचित रकम
- अन्य कोई कारक
विद्यालय स्तरीय फीस समिति इस रिपोर्ट पर सर्वसम्मति से निर्णय करेगी।
खंड स्तरीय फीस विनियामक समिति (Divisional Fee Regulatory Committee)
विद्यालय स्तरीय फीस समिति अगर फीस के बारे में कोई निर्णय नहीं ले पाती है या किसी तरह का कोई मतभेद होता है, तो राज्य सरकार द्वारा खंड स्तर पर एक फीस विनियामक समिति का गठन किया जाएगा।
स्कूल द्वारा अधिक फीस लेने पर खंड स्तरीय समिति उसे वापस करने के लिए भी कह सकती है।
खंड स्तरीय समिति में भी दो अभिभावक या उनके प्रतिनिधि शामिल किए जाएंगे।
फीस पुनरीक्षण समिति (Fee Revision Committee)
अगर खंड स्तरीय फीस समिति द्वारा निर्धारित फीस से स्कूल मैनेजमेंट अथवा विद्यालय स्तरीय फीस समिति राजी नहीं है, तो राज्य सरकार द्वारा फीस पुनरीक्षण समिति का गठन किया जाएगा।
इस समिति में भी दो अभिभावक या उनके प्रतिनिधि शामिल किए जाएंगे।
फीस पुनरीक्षण समिति द्वारा किया गया निर्णय अंतिम होगा और स्कूल इसे मानने के लिए तीन वर्षों के लिए बाध्य होगा।
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| Photo: A group of School Children |
इस प्रकार राजस्थान सरकार द्वारा प्राइवेट स्कूल फीस नियंत्रण (Private School Fee Regulation in Rajasthan) के लिए 2016 में ही अधिनियम पारित किया जा चुका है और इसके लिए 2017 में नियम बनाए जा चुके हैं।
लेकिन क्या राजस्थान में निजी स्कूल सरकार के इस नियम की पालना कर रहे हैं? क्या अभिभावक इस अहम कानून के बारे में जानकारी रखते हैं?




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