Artemis-II मिशन: जिज्ञासा कैसे ले गई इंसान को चांद तक?

चांद को लेकर इंसान की जिज्ञासा उसे ऐसे मुकाम पर ले आई है कि चांद पर जाना आज इंसान के लिए कोई दूर की कौड़ी नहीं रहा।
इंसान जब भी आकाश की ओर देखता था, तो चांद का आकर्षण, उसका रहस्य और उससे जुड़ी कल्पनाएं उसे हमेशा अपनी ओर खींचती थीं।
चंद्रमा ने इंसान को हमेशा से ही अचंभित किया है और उसे हमेशा से ही वहां जाने की लालसा रही है।
पूरे सौर मंडल में चांद ही एक ऐसा पिंड है जो पृथ्वी के सबसे निकट है और यह पृथ्वी का एक प्राकृतिक उपग्रह (Natural Satellite) है।
प्राचीन समय से लेकर आधुनिक युग तक चांद धरतीवासियों के जीवन का अहम हिस्सा है।
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| Real Photo of Moon by NASA's Artemis-2 Mission |
आखिर इंसान चांद को लेकर इतना उत्साहित क्यों रहता है?
प्राचीन समय से जिज्ञासा
प्राचीन समय में जब विज्ञान विकसित नहीं था, तो इंसान के लिए चांद के बारे में केवल कल्पनाएं करना ही संभव था।
चांद प्राचीन समय से ही आस्था का विषय भी रहा है और सभी धर्मों में इसके बारे में अलग-अलग मान्यताएं भी प्रचलित हैं।
दादी और नानी की चंदा मामा की कहानियां तो वर्तमान में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी प्राचीन समय से थीं।
जब धीरे-धीरे विज्ञान ने अपने पैर फैलाने शुरू किए, तो इंसान ने चांद के प्रति अपनी आस्था, कल्पना और कहानियों से आगे निकलकर इसे और गहराई से समझने का प्रयास किया और परिणामस्वरूप आज इंसान चांद की सतह (Moon Surface) पर कदम रख चुका है।
विज्ञान के जरिए जिज्ञासा पूर्ति
इंसान चांद को लेकर इतना जिज्ञासु था कि उसने चांद को और अधिक जानने के लिए नए-नए वैज्ञानिक आविष्कार कर लिए।
गैलीलियो द्वारा Telescope के आविष्कार के बाद चांद से जुड़ी इंसानी कल्पनाओं और रहस्यों को बारीकी से समझने में काफी सहायता मिली।
20 वीं सदी के वैज्ञानिक अनुसंधानों और तकनीकों के द्वारा इंसान ने चांद पर कदम रखकर पूरी दुनिया को आश्चर्यचकित कर दिया।
अमेरिका ने 1969 में अपने मून मिशन Apollo-11 के द्वारा पहली बार किसी इंसान को चांद पर उतारा।
अंतरिक्षीय शक्ति बनने की होड़
चांद पर इंसानों के जाने की शुरुआत तो उसे जानने की इंसानी जिज्ञासा से हुई, लेकिन जब रॉकेट प्रक्षेपण जैसी तकनीकें (Rocket Launch Technology) अधिक विकसित होने लगीं, तो 20 वीं सदी की महाशक्तियों के लिए यह नाक की लड़ाई बन गई।
20 वीं सदी में अमेरिका और रूस ने अपने कई चंद्र मिशन केवल इसलिए किए कि उन्हें अपनी अंतरिक्षीय शक्ति का प्रदर्शन करना था।
Space Power बनने के अलावा शक्तिशाली देश चांद और मंगल पर अपना स्थाई बेस बनाने की दौड़ में हैं, जो भविष्य के व्यापार के नए क्षेत्र की दिशा तय करेगा।
अमरीका का आर्टेमिस-2 (Artemis-II) मिशन
आर्टेमिस-2 मिशन अमेरिका का एक 10 दिनों का मानवयुक्त मिशन है, जिसका काम चंद्रमा के विभिन्न हिस्सों की महत्वपूर्ण जानकारी लेकर वापस धरती पर लौटना है।
यह चांद का एक Flyby मिशन है, जिसे अंतरिक्ष यात्रियों के चांद की सतह पर उतरने की बजाय उसकी कक्षा में चक्कर लगाते हुए इसकी सतह का गहराई से अवलोकन करने के लिए बनाया गया है।
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| Artemis-II Mission Halfway to the Moon |
NASA ने नवंबर 2022 में अपना आर्टेमिस-1 (Artemis-I) मानवरहित मिशन चांद पर सफलतापूर्वक भेजा था और इसका उद्देश्य भी चांद की सतह का अवलोकन कर जानकारी धरती पर भेजना था।
आर्टेमिस-2 अमेरिका के 54 साल पहले भेजे गए अपोलो-17 (1972) के बाद दूसरा मानवयुक्त मिशन है और यह अंतरिक्ष में इंसान को सबसे अधिक दूरी तक ले जाने वाला अभी तक का पहला मिशन साबित होगा।
और एक रोचक बात यह है कि इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को चांद का वह हिस्सा (Far Side of Moon) दिखेगा, जो कभी भी धरती से नहीं देखा जा सकता।
आर्टेमिस-2 मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद की परिक्रमा करते हुए इसकी कुछ सतह की तस्वीरें धरती पर भेजी हैं, जो वास्तव में रोमांचित करने वाली हैं।
जैसे धरती से Moon Rise दिखता है, वैसे ही चांद से Earth Rise की फोटो वास्तव में अद्भुत है।
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| Photo of Earth Rise taken by Artemis-II Crew |
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| Compete Eclipse of Moon seen by Artemis-II Crew |
Artemis मिशनों के जरिए NASA इंसान को 2027 तक फिर से चांद की सतह पर उतारने की योजना पर काम कर रहा है।
भरत के चंद्रयान मिशन (Chandrayana Missions of India)
भारत के चंद्रयान कार्यक्रम के तहत ISRO द्वारा अभी तक तीन मिशन चांद के लिए भेजे जा चुके हैं और चौथा मिशन (चंद्रयान-4) पाइपलाइन में है।
भारत अपने सबसे सफल चंद्रयान-3 मिशन के जरिए चांद की कक्षा में एक ऑर्बिटर के साथ-साथ इसके दक्षिणी ध्रुव पर 'विक्रम' (Lander) और 'प्रज्ञान' (Rover) की सॉफ्ट लैंडिंग करा चुका है।
चंद्रयान-4 मिशन के जरिए ISRO का लक्ष्य चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करवाकर वहां से जरूरी Looner Samples एकत्र कर उन्हें सुरक्षित तरीके से वापस पृथ्वी पर लाना है।
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| ISRO: Photo of 'Vikram' Lander at Moon taken by ' Pragyan' Rover |
अंततः कहा जा सकता है कि चांद को लेकर इंसान की जिज्ञासा ने उसे कल्पनाओं से निकालकर अंतरिक्ष की वास्तविकता तक पहुंचा दिया है।
आज जब दुनिया की बड़ी शक्तियां चांद पर अपने कदम और मजबूत करने की होड़ में लगी हैं, तब यह साफ है कि चांद केवल आसमान में चमकने वाला पिंड नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं का द्वार है।
आने वाले वर्षों में चांद पर मानव की स्थाई मौजूदगी और नए वैज्ञानिक आविष्कार इस बात का प्रमाण होंगे कि इंसान की जिज्ञासा ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।





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