हिंदुत्व बनाम हिंदू धर्म
आइए एक छोटी सी कहानी से समझने कि कोशिश करते हैं कि आखिर हिन्दू धर्म और हिंदुत्व में क्या फर्क है।
बबलू आज स्कूल से जल्दी आ गया था।
मन को थोड़ा हल्का करने के लिए वह अपने मोहल्ले की चाय की थड़ी पर जाकर बैठ गया।
लेकिन आज माहौल कुछ अलग था…
थड़ी पर काफी गर्मा गर्मी थी।
गरम सिंह और नरम सिंह के बीच तगड़ी बहस चल रही थी।
गरम सिंह RSS के हिंदुत्व को लेकर अपनी बात रख रहा था,
जबकि नरम सिंह हिन्दू धर्म की बात कर रहा था।
दोनों की बातें सुनकर बबलू कन्फ्यूज हो गया। 🤔
उसके मन में सवाल उठा --
“RSS का हिंदुत्व और हिन्दू धर्म… क्या ये दोनों एक ही हैं?”
बबलू अब दोनों की बात ध्यान से सुनने लगा।
नरम सिंह कह रहा था --
मैं सनातनी हिन्दू हूं…
हिन्दू धर्म के अनुसार जीवन जीने की कोशिश करता हूं।
हिन्दू धर्म एक जीवन शैली है,
और हिन्दू होना एक व्यक्तिगत मामला है।
धर्म सामूहिक नहीं हो सकता, यह तो व्यक्तिगत मामला है।
समूह का तो संप्रदाय होता है।
मैं गीता, उपनिषद और ब्रह्मसूत्र जैसे ग्रंथों को पढ़कर
जीवन के गूढ़ प्रश्नों के उत्तर खोजने की कोशिश करता हूं।
गरम सिंह अपनी बात जोर से रखता है --
"भारत में रहने वाले सभी लोग हिन्दू हैं।
हमारे देश में आदि शंकराचार्य, शिवाजी महाराज, रानी लक्ष्मीबाई, मीरा बाई जैसे महान हिन्दू लोग हुए हैं…
हमारी हिन्दू परंपरा महान है और मुझे इस पर गर्व है।
इसलिए सभी हिन्दुओं को एक होना चाहिए,
अगर ऐसा नही हुआ तो हिन्दू धर्म खतरे में पड़ सकता है।"
गरम सिंह RSS के हिंदुत्व से काफी प्रभावित था
और हिन्दू संस्कृति की रक्षा की बात कर रहा था।
उसकी बातों में हिन्दू धर्म की जीवन शैली और मूल्यों से जुड़े तर्क कम दिखाई दे रहे थे।
नरम सिंह को यह बात समझ नहीं आई।
वह शांत स्वर में कहता है --
"जिस सनातन धर्म का अर्थ ही है --
जो सदा से है और सदा रहेगा…
और जिसमें संपूर्ण मानवता के कल्याण की बात की गई है,
क्या उसे भी अपनी रक्षा की जरूरत है?"
नरम सिंह हिन्दू धर्म के ग्रंथों में वर्णित गूढ़ दर्शन के आधार पर अपने तर्क दे रहा था।
अब बबलू को धीरे-धीरे फर्क समझ आने लगा था…
एक तरफ तो
हिन्दू धर्म - व्यक्तिगत आस्था, जीवन शैली और दर्शन की बात हो रही थी
और दूसरी तरफ
हिंदुत्व - संस्कृति, पहचान और एकता पर जोर देने वाली सोच पर जोर दिया जा रहा था।
बबलू को अब समझ आने लगा है की
हिन्दू होना असल में क्या है --
जीवन जीने का तरीका,
या एक पहचान?
इस कहानी का निष्कर्ष
अगर हिन्दू धर्म की बात करें तो यह एक व्यक्तिगत आस्था का विषय है। हिन्दू धर्म का आधार गीता, उपनिषद और ब्रह्मसूत्र जैसे ग्रन्थ है। जो भी व्यक्ति सनातन विचारधारा के अनुसार जीवन जीता है, वह सनातनी या हिन्दू माना जाता है।
जबकि हिंदुत्व के बारे में कहा जाए तो यह एक दक्षिणपंथी राजनीतिक विचार है जो विनायक दामोदर सावरकर द्वारा दिया गया था। हिन्दुत्व की विचारधारा केवल हिन्दू संस्कृति पर गर्व करने की बात पर टिकी हुई है।
हिन्दुत्व के बारे में कहा जाता है कि यह एक फासीवादी विचार है। सावरकर की इसी विचारधारा पर RSS काम करता है। [Source: Wikipedia - Hindutva]
वर्तमान में आम हिन्दू अथवा सनातन धर्म को मानने वाला व्यक्ति हिन्दू धर्म और हिंदुत्व को लेकर असमंजस में रहता है और कई बार दोनों को एक ही मान बैठता है।
जरूर पढ़ें 👇
Comments
Post a Comment